कालसर्प दोष के प्रकार: 12 पारंपरिक नाम और उनका अर्थ
मंगल, 13 अक्टूबर 2026 · लेखक: पंडित रवि गुरुजी
अनंत, कुलिक, वासुकि और नौ अन्य: कालसर्प दोष के 12 पारंपरिक प्रकारों की संक्षिप्त जानकारी और यह कि हर नाम जन्म कुंडली में किस स्थिति की ओर संकेत करता है।
प्रकारों के नाम कैसे तय होते हैं
परंपरा में कालसर्प दोष के बारह प्रकार बताए गए हैं, जिनमें से अधिकतर के नाम वासुकि, तक्षक और शेषनाग जैसे पौराणिक नागों पर हैं। नाम इस पर निर्भर करता है कि राहु और केतु किन भावों में हैं। ये दोनों कुंडली में हमेशा एक-दूसरे के ठीक सामने रहते हैं। इसलिए हर प्रकार असल में कुंडली की एक स्थिति का वर्णन भर है।
मूल दोष की तरह इन नामों को कितना महत्व दिया जाए, इस पर भी ज्योतिषियों के मत अलग हैं और कुछ सूचियों में छोटे-मोटे अंतर मिल सकते हैं [TO VERIFY]।
क्या आप पूजा बुक करना चाहते हैं?
पहले छह प्रकार
पहले छह प्रकारों में राहु पहले से छठे भाव के बीच रहता है और केतु उसके ठीक सामने। यहाँ दिए गए जीवन क्षेत्र वे हैं जिनसे इन भावों को परंपरागत रूप से जोड़ा जाता है:
- अनंत: राहु पहले भाव में, केतु सातवें में; स्वयं और साझेदारी
- कुलिक: राहु दूसरे भाव में, केतु आठवें में; परिवार, वाणी और बचत
- वासुकि: राहु तीसरे भाव में, केतु नौवें में; भाई-बहन, साहस और भाग्य
- शंखपाल: राहु चौथे भाव में, केतु दसवें में; घर, माता और कामकाज
- पद्म: राहु पाँचवें भाव में, केतु ग्यारहवें में; संतान, शिक्षा और लाभ
- महापद्म: राहु छठे भाव में, केतु बारहवें में; स्वास्थ्य, कर्ज और खर्च
क्या आप पूजा बुक करना चाहते हैं?
बाकी छह प्रकार
बाकी छह प्रकारों में स्थिति उलट जाती है और राहु सातवें से बारहवें भाव के बीच रहता है:
- तक्षक: राहु सातवें भाव में, केतु पहले में; विवाह और साझेदारी
- कर्कोटक: राहु आठवें भाव में, केतु दूसरे में; अचानक बदलाव और पारिवारिक धन
- शंखचूड़: राहु नौवें भाव में, केतु तीसरे में; भाग्य, पिता और आस्था
- घातक: राहु दसवें भाव में, केतु चौथे में; कामकाज और घरेलू जीवन
- विषधर: राहु ग्यारहवें भाव में, केतु पाँचवें में; मित्र, लाभ और संतान
- शेषनाग: राहु बारहवें भाव में, केतु छठे में; खर्च, विदेश यात्रा और स्वास्थ्य
क्या आप पूजा बुक करना चाहते हैं?
प्रकार से क्या पता चलता है और क्या नहीं
प्रकार से बस इतना पता चलता है कि ज्योतिषी जीवन के किन क्षेत्रों को ध्यान से देखेंगे। यह किसी घटना की भविष्यवाणी नहीं है और एक ही प्रकार वाले दो लोगों का जीवन बिल्कुल अलग हो सकता है। ग्रहों का बल, दृष्टि और चल रही दशा भी देखी जाती है, और आंशिक या खंडित योग को अलग तरह से समझा जा सकता है।
नाम जानने से ज्योतिषी से बात करना आसान हो सकता है, लेकिन केवल नाम के कारण चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।
क्या आप पूजा बुक करना चाहते हैं?
क्या प्रकार से पूजा बदल जाती है
परिवार अक्सर पूछते हैं कि क्या हर प्रकार के लिए अलग विधि होती है। नासिक के पास त्र्यंबकेश्वर में कालसर्प पूजा आम तौर पर एक ही पद्धति से होती है, जिसमें संकल्प और कुछ बातें व्यक्ति के अनुसार बदली जाती हैं [TO VERIFY]। कुछ स्थितियों में गुरुजी राहु केतु पूजा की बात भी कर सकते हैं।
अपना जन्म विवरण साथ रखें ताकि कुंडली ठीक से देखी जा सके। याद रखें कि ये विधियाँ आस्था का विषय हैं और इनके किसी परिणाम की गारंटी नहीं है। जब आप तैयार हों, तो यहाँ तिथि के लिए अनुरोध करें।
क्या आप पूजा बुक करना चाहते हैं?