महामृत्युंजय जाप त्र्यंबकेश्वर में कराने का अर्थ है भगवान शिव के सबसे प्रसिद्ध वैदिक मंत्रों में से एक का लंबा, विधिपूर्वक और गिनती के साथ जाप, वह भी उसी ज्योतिर्लिंग नगरी में जिसका नाम इस मंत्र के पहले शब्द से जुड़ा है। वह शब्द है त्र्यंबक, यानी तीन नेत्रों वाले शिव।
यह मंत्र ऋग्वेद के सातवें मंडल (7.59.12) में मिलता है और यजुर्वेद में भी आता है:
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्॥
इसका भाव यह है: हम सुगंधित और सबका पोषण करने वाले त्रिनेत्र शिव की उपासना करते हैं। जैसे पका हुआ फल अपनी बेल से सहज ही छूट जाता है, वैसे ही हमें मृत्यु के बंधन से मुक्त करें, पर अमृत से दूर न रखें।
मृत्युंजय का अर्थ है मृत्यु पर विजय पाने वाला। इसी कारण बहुत से भक्त इसे केवल लंबी आयु की प्रार्थना नहीं, बल्कि भय और आसक्ति से मुक्ति की प्रार्थना भी मानते हैं। प्रचलित कथाओं में इसका संबंध बालक मार्कंडेय से बताया जाता है, जिनकी रक्षा स्वयं भगवान शिव ने की, ऐसा माना जाता है। ऐसी कथाएँ भक्ति का संदेश देती हैं, किसी के स्वास्थ्य का वचन नहीं।
सवा लाख महामृत्युंजय जाप का अर्थ
सवा लाख का मतलब है 1.25 लाख, यानी 1,25,000। सवा लाख महामृत्युंजय जाप में पंडित मिलकर कई दिनों में मंत्र की यह पूरी संख्या माला पर गिनते हुए पूरी करते हैं, और हर दिन का जाप आपके परिवार के नाम से लिए गए संकल्प को समर्पित रहता है।
आस्था और इलाज
यह जाप एक प्रार्थना है। यह इलाज की जगह नहीं ले सकता, और इस पेज की कोई भी बात चिकित्सकीय सलाह नहीं है। परिवार में कोई बीमार हो तो डॉक्टर की सलाह मानते रहें और दवाइयाँ जारी रखें; जाप को उपचार के साथ की गई प्रार्थना की तरह ही देखें। महामृत्युंजय जाप के लाभ इस पेज पर पारंपरिक मान्यताओं के रूप में बताए गए हैं, और किसी विशेष परिणाम का वचन कोई नहीं दे सकता।
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