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त्र्यंबकेश्वर पूजा

त्र्यंबकेश्वर के पास घूमने की जगहें

त्र्यंबकेश्वर के पास घूमने की जगहें एक-दूसरे से ज्यादा दूर नहीं हैं, इसलिए यहां की तीर्थयात्रा में आप पवित्र कुंड, दो ऐतिहासिक पहाड़ियां और नासिक के मंदिर और गुफाएं भी देख सकते हैं। नीचे जानिए कि हर जगह क्या खास है और उसे अपनी पूजा के साथ कैसे जोड़ा जाए।

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बादलों के नीचे ब्रह्मगिरि पर्वत की हरी ढलानें
फोटो: The MH15, CC BY-SA 4.0

कुशावर्त कुंड

कुशावर्त कुंड मंदिर के पास का पवित्र कुंड है। परंपरा के अनुसार गोदावरी यहीं अपना रूप लेकर दक्कन की ओर आगे बढ़ती है, इसलिए श्रद्धालुओं के लिए इस कुंड का बहुत महत्व है।

इसका निर्माण इंदौर रियासत के फडणवीस रावसाहेब पारनेरकर ने करवाया था, और किनारे पर उनकी और उनकी पत्नी की अर्धप्रतिमा आज भी दिखती है। सिंहस्थ कुंभ के स्नान में भी इस कुंड का प्रमुख स्थान है, जिसके बारे में आप हमारे कुंभ मेला पेज पर पढ़ सकते हैं। त्योहारों पर स्नान का समय और नियम बदल सकते हैं [TO VERIFY]।

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ब्रह्मगिरि ट्रेक

ब्रह्मगिरि पश्चिमी घाट की वह पहाड़ी है जो नगर के पीछे खड़ी दिखती है और समुद्र तल से करीब 1,295 मीटर ऊंची है। हिंदू परंपरा में यहां गौतम ऋषि और अहल्या का आश्रम माना जाता है और गोदावरी का उद्गम इसी पहाड़ी से जोड़ा जाता है, इसलिए कई श्रद्धालु भक्ति भाव से इस पर चढ़ते हैं।

करीब 750 सीढ़ियां चढ़कर गंगाद्वार पहुंचते हैं, जहां गंगा का मंदिर है [TO VERIFY]। पास ही कोलंबिका देवी मंदिर, 108 शिवलिंगों का समूह और गोरक्षनाथ गुफा हैं, और चोटी तक एक अलग रास्ता जाता है। ट्रेक करने वालों के अनुभव के अनुसार दोनों हिस्सों में करीब 45-45 मिनट लगते हैं, लेकिन बच्चों या बुजुर्गों के साथ ज्यादा समय रखें [TO VERIFY]।

  • उजाला होते ही चढ़ाई शुरू करें और पानी साथ रखें।
  • चप्पल की जगह अच्छी पकड़ वाले जूते पहनें।
  • बारिश में सीढ़ियां और चट्टानें फिसलन भरी हो सकती हैं, इसलिए रास्ते की हालत और प्रवेश के नियम स्थानीय लोगों से पूछ लें [TO VERIFY]।

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अंजनेरी

अंजनेरी नासिक-त्र्यंबक मार्ग पर किले वाली पहाड़ी है, जो नासिक से करीब 20 किमी दूर है, यानी त्र्यंबकेश्वर आते समय रास्ते में ही पड़ती है। इसकी ऊंचाई करीब 1,280 मीटर है। परंपरा इसे हनुमान जी का जन्मस्थान मानती है और पहाड़ी का नाम उनकी माता अंजना से जुड़ा है।

यहां करीब 11वीं और 12वीं सदी की चट्टानों में तराशी गई जैन गुफाएं भी हैं, और 2017 में इस क्षेत्र को संरक्षण रिजर्व घोषित किया गया था। ट्रेकिंग के शौकीनों में यह खास तौर पर बारिश के मौसम में लोकप्रिय है। जाने से पहले रास्ते की हालत और चढ़ाई के नियम पता कर लें [TO VERIFY]।

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नासिक के दर्शनीय स्थल

करीब 28 किमी दूर नासिक शहर आते या जाते समय आसानी से देखा जा सकता है।

  • पंचवटी: गोदावरी के किनारे का वह इलाका जो रामायण से जुड़ा है और जहां कई मंदिर और तीर्थ स्थल हैं।
  • कालाराम मंदिर: भगवान राम का प्रमुख मंदिर, जिसे 1930 में डॉ. बी. आर. आंबेडकर के नेतृत्व वाले मंदिर प्रवेश आंदोलन के लिए भी याद किया जाता है।
  • रामकुंड और सीता गुफा: पंचवटी क्षेत्र के दो प्रसिद्ध स्थान, जिन्हें परंपरा राम और सीता से जोड़ती है [TO VERIFY]।
  • त्रिरश्मि (पांडवलेणी) गुफाएं: पहली सदी ईसा पूर्व से दूसरी सदी ईस्वी के बीच तराशी गई 24 बौद्ध गुफाओं का समूह।

खुलने का समय और प्रवेश शुल्क बदल सकते हैं, इसलिए जाने से पहले जांच लें [TO VERIFY]।

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पूजा के साथ घूमने की योजना

सबसे पहले अपनी विधि को रखें। ट्रेक या लंबी यात्रा कालसर्प पूजा या रुद्राभिषेक के बाद ही रखें, और गुरुजी से पूछ लें कि आपकी तारीख पर कितना समय खाली रहेगा।

एक सरल योजना कुछ ऐसी हो सकती है:

  • त्र्यंबकेश्वर नगर में: मंदिर के दर्शन और कुशावर्त कुंड, जो पास-पास हैं
  • आधा दिन या ज्यादा: ब्रह्मगिरि या अंजनेरी
  • लौटते समय: नासिक की पंचवटी और गुफाएं

एक दिन से ज्यादा रुकना हो तो त्र्यंबकेश्वर में कहां ठहरें पढ़ें, और मंदिर के इतिहास के लिए त्र्यंबकेश्वर ज्योतिर्लिंग पेज देखें। तारीखें तय हो जाएं तो पूजा की बुकिंग का अनुरोध भेजें।

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