त्रिपिंडी श्राद्ध त्र्यंबकेश्वर में किया जाने वाला एक दिन का पितृ अनुष्ठान है, जिसमें परिवार अपने दिवंगत परिजनों की स्मृति में तीन पिंड अर्पित करता है। "त्रि" का अर्थ है तीन, और "पिंड" वह अन्न-अर्पण है जो श्राद्ध में पितरों के नाम से दिया जाता है। परंपरा में यह अनुष्ठान विशेष रूप से पिछली तीन पीढ़ियों के उन पूर्वजों से जोड़ा जाता है, जिनका वार्षिक श्राद्ध किसी कारण छूट गया हो या जिनकी तिथि अब परिवार को याद न हो।
इस त्रिपिंडी श्राद्ध पूजा में गुरुजी हर चरण का अर्थ सरल भाषा में समझाते हुए परिवार का मार्गदर्शन करते हैं, ताकि उपस्थित सभी लोग जान सकें कि क्या अर्पित हो रहा है और क्यों। अनुष्ठान में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का आवाहन किया जाता है और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना के साथ पिंड अर्पित किए जाते हैं।
त्रिपिंडी श्राद्ध और नारायण नागबली में अंतर
दोनों ही पितृ अनुष्ठान यहाँ होते हैं, इसलिए परिवार अक्सर इनका अंतर पूछते हैं। मोटे तौर पर, त्रिपिंडी श्राद्ध एक दिन का अनुष्ठान है, जिसका केंद्र छूटे हुए पितृ-कर्म हैं। वहीं नारायण नागबली पूजा आमतौर पर तीन दिनों में पूरी होती है और परंपरा में इसे अकाल मृत्यु तथा सर्प से जुड़े प्रायश्चित से जोड़ा जाता है। जिन परिवारों की कुंडली में पितृ दोष का उल्लेख हुआ हो, वे पितृ दोष पूजा के बारे में भी जानकारी लेते हैं। यदि आप तय नहीं कर पा रहे कि आपके परिवार के लिए कौन-सा अनुष्ठान उपयुक्त है, तो निर्णय से पहले गुरुजी से बात कर सकते हैं।